Monday, October 25 2021

June 12, 2021

कोविशील्ड की खुराक में अंतराल को तत्काल बदलने की कोई जरूरत नहीं

नई दिल्ली – हालिया अध्ययनों का उल्लेख करते हुए कुछ मीडिया रिपोर्ट्स में कहा गया है कि प्रसारित हो रहे विभिन्न संस्करणों के मद्देनजर, कोविशील्ड टीके की दो खुराकों के बीच के अंतराल को घटा देना बेहतर होगा।

डॉ. वी के पॉल, सदस्य (स्वास्थ्य), नीति आयोग ने भरोसा दिलाया है कि खुराकों के बीच मौजूदा अंतराल को तत्काल बदलने की जरूरत को लेकर हड़बड़ी करने की कोई जरूरत नहीं है। डॉ. पॉल आज राष्ट्रीय मीडिया केंद्र, पीआईबी, दिल्ली में कोविड-19 पर मीडिया ब्रीफिंग को संबोधित कर रहे थे।

उन्होंने कहा कि “किसी भी तरह से घबराने की जरूरत नहीं है, तत्काल बदलाव करने या खुराक के बीच के अंतराल को बदलने की भी आवश्यकता नहीं है। ये सभी निर्णय बहुत सावधानी से लिए जाने चाहिए। हमें याद रखना चाहिए कि जब हमने (दो खुराकों के बीच में) अंतर को बढ़ाया था, तब हमने सिर्फ एक खुराक ले चुके लोगों के सामने वायरस के जोखिम पर विचार किया था। लेकिन पूरकबिंदु यह था कि तब अधिक लोग पहली खुराक पाने में सक्षम होंगे, जिससे ज्यादा लोगों को उचित मात्रा में प्रतिरक्षा दी जा सकेगी।” डॉ. पॉल ने आगे कहा कि “हमें इन चिंताओं को संतुलित करने की जरूरत है। इसलिए कृपया याद रखें, हमें इस बहस और चर्चा को सार्वजनिक रूप से रखने की भी जरूरत है; कि इस बारे में उचित मंचों की ओर से निर्णय लिया जाना है, जिसमें प्रतिष्ठित व्यक्ति शामिल हैं, जो इस बारे में जानते हैं।”

सदस्य (एच), नीति आयोग ने बताया कि “हमारे प्रतिरक्षण पर राष्ट्रीय तकनीकी सलाहकार समूह (एनटीएजीआई) में, ऐसे पर्याप्त लोग हैं जो डब्ल्यूएचओ पैनल और समितियों का हिस्सा रहे हैं, वैश्विक स्तर पर चर्चित हैं और अपनी श्रेष्ठता के लिए जाने जाते हैं। इसके अलावा, जब वैश्विक और राष्ट्रीय टीकाकरण कार्यक्रमों की बात आती है तो एनटीएजीआई को एक मानक माना जाता है। इसलिए कृपया उसके फैसलों का सम्मान करें।”

इस विषय पर चर्चा का स्वागत करते हुए, डॉ. पॉल ने ऐसे निर्णयों तक पहुंचने के लिए उचित वैज्ञानिक प्रक्रिया अपनाने की जरूरत को रेखांकित किया है; उन्होंने लोगों से एनटीएजीआई के फैसलों का सम्मान करने की भी अपील की है, जो वैश्विक स्तर पर प्रतिष्ठित विशेषज्ञों की एक संस्था है। उन्होंने कहा, “खुराकों के बीच अंतराल संबंधी फैसले को उचित प्रक्रिया के आधार पर एनटीएजीआई को परखने दें। यूनाइटेड किंगडम ने अंतराल संबंधी अपना पहले का फैसला बदलने के लिए निश्चित रूप से उचित प्रक्रिया को अपनाया है और आंकड़ों को वैज्ञानिक रूप से जांचा है। यूके ने पहले 12 सप्ताह का अंतर रखा था, लेकिन हमारे पास उपलब्ध आंकड़ों के आधार पर, हमने उस समय इसे सुरक्षित नहीं माना था। इसलिए, आइए इसे हम अपने वैज्ञानिक मंचों को सौंप दें, वे पहले से ही इस मामले को देख रहे हैं। वे हमारे देश में महामारी की स्थिति के आधार पर, हमारे देश में डेल्टा वेरिएंट के प्रसार के दायरे के आधार पर, इसकी समीक्षा करेंगे और एक व्यापक नजरिया अपनाएंगे। हमारे वैज्ञानिक समुदाय द्वारा जो भी निर्णय लिया जाएगा, हम उसका सम्मान करेंगे।”